जब प्रेम का प्रवाह हृदय में होता है तो ज्ञान विवेक हो जाता है...........जैसे बालक जब जन्म लेता है तो जन्म देने वाली माँ बच्चे के प्रति सावधानी या देख रेख को लेकर कोई किताब नहि पड़ती..........बालक के प्रति हुए उस अथाह प्रेम के चलते जन्म देने वाली माँ स्वतः ही जागरूक हो जाती है बालक के प्रति सजग हो उसके लिए क्या अच्छा क्या बुरा सभी जानकारी स्वतः ही विवेक बन प्रकट हो जाती है.....मुझे लगता है प्रेम से ज्ञान उपजा है ज्ञान से प्रेम नहि.......
जब प्रेम का प्रवाह हृदय में होता है तो ज्ञान विवेक हो जाता है...........जैसे बालक जब जन्म लेता है तो जन्म देने वाली माँ बच्चे के प्रति सावधानी या देख रेख को लेकर कोई किताब नहि पड़ती..........बालक के प्रति हुए उस अथाह प्रेम के चलते जन्म देने वाली माँ स्वतः ही जागरूक हो जाती है बालक के प्रति सजग हो उसके लिए क्या अच्छा क्या बुरा सभी जानकारी स्वतः ही विवेक बन प्रकट हो जाती है.....मुझे लगता है प्रेम से ज्ञान उपजा है ज्ञान से प्रेम नहि........

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